Unique Temple: कहां है पहला तिरुपति मंदिर, देवताओं ने रखी जिसकी नींव? 9 हजार साल पुराना इतिहास

भारत को मंदिरों का देश कहा जाता है। यहां हर राज्य, हर शहर और हर गांव में कोई न कोई ऐसा धार्मिक स्थल जरूर मिलता है, जो अपनी कहानी, मान्यताओं और रहस्यों की वजह से लोगों को आकर्षित करता है। इन्हीं खास धार्मिक स्थलों में से एक है आंध्र प्रदेश का Unique Temple, जिसे लोग टोली तिरुपति मंदिर के नाम से जानते हैं। यह मंदिर न सिर्फ अपनी प्राचीनता के लिए मशहूर है, बल्कि इसे दुनिया का पहला तिरुपति मंदिर भी माना जाता है।

कहा जाता है कि जिस तरह आज तिरुमला में भगवान वेंकटेश्वर की भव्य पूजा होती है, उससे भी पहले यहां भगवान विष्णु की आराधना की जाती थी। यही वजह है कि यह Unique Temple आज भी श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों के लिए आस्था और रहस्य का केंद्र बना हुआ है।

Unique Temple
Unique Temple: कहां है पहला तिरुपति मंदिर, देवताओं ने रखी जिसकी नींव? 9 हजार साल पुराना इतिहास

कहां स्थित है टोली तिरुपति का Unique Temple?

टोली तिरुपति मंदिर आंध्र प्रदेश के काकीनाडा जिले में स्थित दिविली नामक स्थान पर है। यह मंदिर गांवों और हरियाली से घिरे शांत वातावरण में मौजूद है। भीड़भाड़ और शोर-शराबे से दूर यह Unique Temple उन लोगों के लिए खास बन जाता है, जो आध्यात्मिक शांति की तलाश में रहते हैं।

स्थानीय लोग इसे श्री श्रृंगार वल्लभ स्वामी मंदिर भी कहते हैं। मान्यता है कि यही वह स्थान है, जहां भगवान विष्णु ने ध्रुव को साक्षात दर्शन दिए थे।


9 हजार साल पुराना इतिहास बनाता है इसे Unique Temple

इतिहासकारों और पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार, टोली तिरुपति मंदिर का वर्तमान स्वरूप लगभग 9 हजार साल पुराना बताया जाता है। हालांकि समय के साथ-साथ मंदिर का जीर्णोद्धार होता रहा, लेकिन इसकी मूल पहचान आज भी बनी हुई है।

कहा जाता है कि चालुक्य राजाओं के शासनकाल में इस मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया था। मंदिर की वास्तुकला में द्रविड़ शैली की साफ झलक देखने को मिलती है। ऊंचे स्तंभ, नक्काशीदार दीवारें और गर्भगृह की संरचना इसे एक Unique Temple बनाती हैं।


क्यों कहा जाता है पहला तिरुपति मंदिर?

आज जब भी तिरुपति बालाजी का नाम लिया जाता है, तो तिरुमला का मंदिर सबसे पहले दिमाग में आता है। लेकिन मान्यताओं के अनुसार, टोली तिरुपति मंदिर तिरुमला से भी पहले अस्तित्व में था। यही वजह है कि इसे “पहला तिरुपति” कहा जाता है।

स्थानीय कथाओं के अनुसार, देवताओं ने स्वयं इस मंदिर की नींव रखी थी। इसी कारण इसे एक दिव्य Unique Temple माना जाता है, जहां पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।


भगवान विष्णु की मुस्कुराती प्रतिमा

टोली तिरुपति के Unique Temple में भगवान विष्णु की प्रतिमा को श्रृंगार वल्लभ स्वामी के रूप में पूजा जाता है। इस प्रतिमा की सबसे खास बात यह है कि भगवान यहां मुस्कुराते हुए दिखाई देते हैं।

कहा जाता है कि भगवान की यह मुस्कान भक्तों के दुख दूर करने और मन को शांति देने का प्रतीक है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती।


सात दरवाजों का रहस्य

इस Unique Temple तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को सात दरवाजों से होकर गुजरना पड़ता है। इन सात दरवाजों को मानव जीवन के सात जन्मों का प्रतीक माना जाता है।

मान्यता है कि जैसे-जैसे भक्त एक-एक द्वार पार करता है, वैसे-वैसे उसके जीवन के पाप और कष्ट पीछे छूटते जाते हैं। गर्भगृह तक पहुंचते-पहुंचते मन पूरी तरह शुद्ध हो जाता है।


ध्रुव की तपस्या और टोली तिरुपति

टोली तिरुपति मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा ध्रुव से संबंधित है। पौराणिक कथा के अनुसार, राजा उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव ने भगवान विष्णु को पाने के लिए कठोर तपस्या की थी।

नारद मुनि के मार्गदर्शन में ध्रुव ने “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए। मान्यता है कि यही दर्शन इसी Unique Temple के स्थान पर हुए थे।


मंदिर परिसर की खास बातें

टोली तिरुपति का Unique Temple सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। मंदिर परिसर में एक प्राचीन ध्वज स्तंभ स्थापित है। दीवारों और स्तंभों पर खुदे शिलालेख इसकी प्राचीनता की गवाही देते हैं।

इन शिलालेखों में उस समय के राजाओं, दानदाताओं और धार्मिक परंपराओं का उल्लेख मिलता है। यही वजह है कि इतिहासकार भी इस मंदिर पर विशेष अध्ययन करते हैं।


कैसे पहुंचे टोली तिरुपति का Unique Temple?

अगर आप इस Unique Temple के दर्शन करना चाहते हैं, तो यहां पहुंचना काफी आसान है।

  • रेल मार्ग: काकीनाडा, समरलाकोटा और पेद्दापुरम नजदीकी रेलवे स्टेशन हैं।
  • सड़क मार्ग: आंध्र प्रदेश के प्रमुख शहरों से बस और टैक्सी की सुविधा उपलब्ध है।
  • हवाई मार्ग: राजमुंदरी एयरपोर्ट यहां से लगभग 50 किमी दूर है।

क्यों जरूर जाएं यह Unique Temple?

अगर आप धार्मिक आस्था, इतिहास और रहस्यों में रुचि रखते हैं, तो टोली तिरुपति मंदिर आपके लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है। यह Unique Temple न सिर्फ भगवान विष्णु की भक्ति का प्रतीक है, बल्कि भारत की प्राचीन धार्मिक परंपराओं को भी दर्शाता है।


ROZ KI BAAT

टोली तिरुपति मंदिर हमें यह सिखाता है कि आस्था और विश्वास समय से भी बड़े होते हैं। हजारों साल बीत जाने के बाद भी यह Unique Temple आज उतना ही जीवंत है, जितना कभी था।


Disclaimer:
इस आर्टिकल में दी गई जानकारी धर्म ग्रंथों, लोक मान्यताओं और इतिहासकारों के संदर्भ पर आधारित है। ROZ KI BAAT इन मान्यताओं की पुष्टि का दावा नहीं करता। इसे केवल सामान्य जानकारी के रूप में लें।

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