भारत में हजारों मंदिर हैं, लेकिन कुछ मंदिर अपनी परंपराओं और रहस्यों की वजह से बिल्कुल अलग पहचान रखते हैं। इन्हीं में से एक है वृंदावन का Unique Temple, जिसे हम श्रीरंगनाथ मंदिर के नाम से जानते हैं। यह मंदिर न सिर्फ अपनी विशालता और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां मौजूद वह दिव्य दरवाजा भी लोगों को सबसे ज्यादा आकर्षित करता है, जो पूरे साल बंद रहता है और साल में सिर्फ एक बार खुलता है—वह भी वैकुंठ एकादशी के दिन।
यही वजह है कि इस मंदिर को Unique Temple कहा जाता है, क्योंकि इसकी परंपराएं उत्तर भारत के आम मंदिरों से बिल्कुल अलग हैं और पूरी तरह दक्षिण भारतीय संस्कृति से जुड़ी हुई हैं।

Unique Temple: क्यों है वृंदावन का श्रीरंगनाथ मंदिर इतना खास?
वृंदावन का यह Unique Temple पूरे उत्तर भारत में एक अलग ही महत्व रखता है। यहां भगवान श्रीकृष्ण को रंगनाथ स्वरूप में पूजा जाता है, जो श्रीविष्णु का दक्षिण भारतीय रूप माना जाता है। मंदिर की वास्तुकला, पूजा की विधि और यहां की मान्यताएं बिल्कुल दक्षिण भारत की परंपराओं पर आधारित हैं।
लेकिन इस मंदिर को वास्तव में Unique Temple बनाने वाला कारण है—
“वैकुंठ द्वार”
यह एक ऐसा रहस्यमयी दरवाजा है, जो साल में सिर्फ एक बार खुलता है। भक्त इस दिन का इंतजार पूरे साल करते हैं।
वैकुंठ द्वार—साल में एक बार खुलने वाला रहस्यमयी दरवाजा
श्रीरंगनाथ मंदिर का यह द्वार भक्तों के लिए किसी वरदान से कम नहीं माना जाता।
मान्यता है कि—
“जो भक्त इस वैकुंठ द्वार से गुजरता है, उसे वैकुंठ लोक में स्थान मिलता है।”
इसी वजह से वैकुंठ एकादशी के दिन हजारों भक्त इस मंदिर में उमड़ पड़ते हैं।
इस Unique Temple में वैकुंठ द्वार खोलने की प्रक्रिया भी बहुत अद्भुत है:
21 दिन का उत्सव
वैकुंठ एकादशी से पहले मंदिर में 21 दिनों तक विशेष उत्सव चलता है।
11वें दिन खुलता है द्वार
इस उत्सव के 11वें दिन वैकुंठ द्वार खोला जाता है।
जैसे ही दरवाजा खुलता है, पूरा वातावरण मंत्रों और भक्ति से भर जाता है।
भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पालकी
वैकुंठ एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा को पालकी में बैठाकर इसी द्वार से बाहर निकाला जाता है।
उनके पीछे-पीछे हजारों भक्त भी इस द्वार को पार करते हैं।
यही दृश्य इस Unique Temple को और भी अद्भुत बनाता है।
इस परंपरा से जुड़ी मान्यता — संत आलवर की कथा
वैकुंठ द्वार को लेकर एक बहुत सुंदर कथा प्रचलित है।
कहते हैं कि एक बार प्रसिद्ध संत आलवर ने भगवान विष्णु से पूछा—
“प्रभु! वैकुंठ जाने का मार्ग क्या है?”
तब भगवान विष्णु ने कहा—
“वैकुंठ एकादशी के दिन जो भक्त इस द्वार को पार करेगा, उसे वैकुंठ में स्थान मिलेगा।”
तभी से यह परंपरा शुरू हुई, और आज भी इस Unique Temple में उसी परंपरा को निभाया जाता है।
Unique Temple में स्थापित भगवान विष्णु की अनोखी प्रतिमा
इस मंदिर की दिव्यता सिर्फ वैकुंठ द्वार तक सीमित नहीं है।
यहां स्थापित भगवान विष्णु की प्रतिमा भी अत्यंत अनोखी है।
कहते हैं कि—
- भगवान विष्णु शेषनाग पर विराजित हैं
- देवी लक्ष्मी उनके चरण दबा रही हैं
- यह रूप अत्यंत शांत, दिव्य और अद्भुत है
प्रतिमा का इतिहास भी बेहद रोचक है:
राजा इक्ष्वाकु का तपस्याफल
कहा जाता है कि राजा इक्ष्वाकु ने कठोर तपस्या कर भगवान ब्रह्मा से यह प्रतिमा प्राप्त की थी।
यह प्रतिमा पहले अयोध्या में स्थापित हुई।
विभीषण ने मांगी प्रतिमा
श्रीराम के समय में विभीषण ने यह प्रतिमा श्रीराम से मांगी।
ले जाते समय वे इसे कुछ देर के लिए वृंदावन क्षेत्र में रखकर आगे बढ़ने लगे, लेकिन प्रतिमा यहीं स्थापित हो गई।
तभी से यह स्थान भगवान रंगनाथ के रूप में पूजनीय बन गया और आज यह Unique Temple के नाम से प्रसिद्ध है।
मंदिर का इतिहास—जैन व्यापारी ने करवाया निर्माण
आज का विशाल श्रीरंगनाथ मंदिर 1851 में एक जैन व्यापारी द्वारा बनवाया गया था।
मंदिर का आकार, ग़ोपुरम शैली के विशाल द्वार, और पत्थर की नक्काशी इसे उत्तर भारत का सबसे अनोखा मंदिर बनाते हैं।
यही कारण है कि यह वास्तव में एक Unique Temple है—आस्था, कला और परंपरा का संगम।
Unique Temple क्यों कहलाता है यह मंदिर? — मुख्य कारण
✔ साल में सिर्फ एक बार खुलने वाला वैकुंठ द्वार
✔ दक्षिण भारतीय शैली का उत्तर भारत में बना पहला बड़ा मंदिर
✔ भगवान विष्णु और लक्ष्मी की दुर्लभ विराजमान प्रतिमा
✔ 21 दिन तक चलने वाला विशेष उत्सव
✔ वैकुंठ जाने का दिव्य मार्ग माना जाना
✔ भक्तों की अपार भीड़ और अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव
इन सभी कारणों की वजह से श्रीरंगनाथ मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक Unique Temple बन जाता है।
Conclusion – ROZ KI BAAT
वृंदावन का यह Unique Temple सिर्फ सुंदरता या परंपराओं की वजह से खास नहीं है, बल्कि इसकी दिव्यता इसे और भी रहस्यमयी बनाती है।
साल में एक बार खुलने वाला वैकुंठ द्वार, भगवान विष्णु का अद्भुत स्वरूप और यहां की आस्था इस मंदिर को भारत के सबसे अनोखे मंदिरों में शामिल करते हैं।
अगर आपने कभी इस मंदिर को नहीं देखा है, तो एक बार जरूर जाएं—आपकी यात्रा अविस्मरणीय होगी।
Disclaimer – ROZ KI BAAT
इस लेख में दी गई जानकारी धर्म ग्रंथों, विद्वानों और मान्यताओं पर आधारित है।
ROZ KI BAAT सिर्फ जानकारी पहुंचाने का माध्यम है। इसे सूचना के रूप में ही पढ़ें।
FAQs
1. Unique Temple किसे कहा जाता है?
Unique Temple वृंदावन के श्रीरंगनाथ मंदिर को कहा जाता है, क्योंकि यहां एक ऐसा वैकुंठ द्वार है जो साल में सिर्फ एक बार खुलता है।
2. वैकुंठ द्वार कब खोला जाता है?
वैकुंठ द्वार हर साल सिर्फ वैकुंठ एकादशी के दिन खोला जाता है। इस दिन हजारों भक्त इसे पार करते हैं।
3. वैकुंठ द्वार पार करने की क्या मान्यता है?
मान्यता है कि वैकुंठ एकादशी पर इस द्वार को पार करने से भक्त को वैकुंठ लोक में स्थान प्राप्त होता है।
4. Unique Temple में पूजा किस परंपरा से होती है?
श्रीरंगनाथ मंदिर में पूजा दक्षिण भारतीय वैष्णव परंपरा के अनुसार होती है, इसलिए यह उत्तर भारत का खास Unique Temple माना जाता है।
5. मंदिर की स्थापना कब और किसने कराई थी?
श्रीरंगनाथ मंदिर का निर्माण वर्ष 1851 में एक जैन व्यापारी द्वारा करवाया गया था।