Ram Mandir Flag Hoisting का दिन अयोध्या और पूरे देश के लिए एक ऐतिहासिक पल है। 25 नवंबर 2025 को राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज की स्थापना की जाएगी। यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का पर्व है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश की कई प्रमुख हस्तियां अयोध्या पहुंचेंगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अयोध्या की खोज किसने की थी? और सबसे पहले रामलला का मंदिर किस राजा ने बनवाया था?
आज हम ROZ KI BAAT में आपको अयोध्या और राम मंदिर के उस इतिहास से रूबरू करवाने वाले हैं, जिसे जानकर आप गर्व महसूस करेंगे।

अयोध्या: भगवान श्रीराम की जन्मस्थली
अयोध्या दुनिया के सबसे प्राचीन और पवित्र नगरों में से एक है। इसे सप्तपुरियों में स्थान प्राप्त है। अनेक पुराणों, स्मृतियों और ऐतिहासिक ग्रंथों में इसका विस्तार से वर्णन मिलता है।
लेकिन समय बीतने के साथ, विशेषकर द्वापर युग के अंत के बाद, अयोध्या धीरे-धीरे गुमनाम होने लगी। इसका वैभव लगभग मिट चुका था। लोग जानते थे कि यह भगवान श्रीराम की जन्मस्थली है, परंतु वास्तविक स्थान और मंदिर का स्वरूप खो गया था।
किसने की अयोध्या की खोज?
यह कहानी बेहद रोचक है और इतिहास में सुनहरे अक्षरों से लिखी जाती है।
प्राचीन समय में उज्जयिनी (आज का उज्जैन) पर शासन करने वाले राजा विक्रमादित्य का नाम भारत के महानतम राजाओं में शामिल है। उनका साम्राज्य भारत से बाहर कई देशों तक फैला हुआ था।
एक बार राजा विक्रमादित्य तीर्थ यात्रा पर निकले और अयोध्या से होकर प्रयागराज पहुंचे। यहीं उनकी मुलाकात एक ब्राह्मण से हुई, जो वास्तव में तीर्थराज प्रयाग थे। उन्होंने राजा को बताया कि अयोध्या अब उजड़ चुकी है, लेकिन यह भगवान श्रीराम की पवित्र जन्मभूमि है और इसका पुनरुद्धार होना चाहिए।
उनकी बात सुनकर राजा विक्रमादित्य ने तुरंत अयोध्या जाने का निश्चय किया।
कैसे मिली भगवान श्रीराम की जन्मभूमि?
जब राजा अयोध्या पहुंचे तो जगह इतनी सुनसान और पहचान से बाहर थी कि जन्मस्थान ढूंढना बेहद मुश्किल था। तभी एक संन्यासी आए और उन्होंने राजा से कहा
“आप एक सफेद गाय बुलवाइए। जिस जगह उसके थन से अपने आप दूध गिरने लगे, वही श्रीराम का जन्मस्थान है।”
राजा ने ऐसा ही किया। कुछ दूर चलते ही एक स्थान पर गाय के थनों से अपने आप दूध गिरने लगा। इसी स्थान को पहचानकर राजा विक्रमादित्य ने भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण का आदेश दिया।
विक्रमादित्य द्वारा बनवाया गया भव्य राम मंदिर
इतिहास के अनुसार, विक्रमादित्य द्वारा बनवाया गया राम मंदिर इतना विशाल था कि 80 किलोमीटर दूर से भी दिखाई देता था।
यह मंदिर सिर्फ आस्था का प्रतीक नहीं था, बल्कि भारतीय स्थापत्य कला का चमत्कार भी था।
दुर्भाग्य से बाद के समय में विदेशी आक्रमणकारियों ने इस मंदिर को नष्ट कर दिया। परंतु उस मंदिर की स्मृति, उसकी महानता और उसका गौरव भारतीयों के हृदय में हमेशा जीवित रहा।
आज का राम मंदिर और Ram Mandir Flag Hoisting
सदियों की प्रतीक्षा, संघर्ष और जन आंदोलन के बाद रामलला का भव्य मंदिर एक बार फिर अपने दिव्य स्वरूप में खड़ा हो चुका है।
25 नवंबर 2025 को मंदिर के शिखर पर Ram Mandir Flag Hoisting का पवित्र आयोजन होगा।
यह वह पल होगा जब अयोध्या का आसमान धर्म ध्वज से सजेगा और पूरा देश इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनेगा।
इस आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित लाखों श्रद्धालु शामिल होंगे। रामलला का मंदिर अब केवल विश्वास नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, इतिहास और गौरव का प्रतीक बन चुका है।
अयोध्या का महत्व क्यों बढ़ जाता है?
- यह भगवान श्रीराम की जन्मभूमि है
- यह सप्तपुरियों में प्रथम स्थान पर है
- यहाँ कई पुराणों में वर्णित प्राचीन स्थल हैं
- राजा विक्रमादित्य के कारण यह फिर से जीवंत हुआ
- अब यहाँ दुनिया का सबसे सुंदर और भव्य राम मंदिर है
Ram Mandir Flag Hoisting का आध्यात्मिक महत्व
राम मंदिर के शिखर पर ध्वज लगाना विजय, धर्म, शक्ति और सद्गुणों की स्थापना का प्रतीक है।
ध्वज लहराना संदेश देता है कि
“अधर्म पर धर्म की जीत होती है, और सत्य कभी हारता नहीं।”
यही कारण है कि Ram Mandir Flag Hoisting सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के लिए भावनाओं से भरा पवित्र क्षण है।
अयोध्या और राम मंदिर को लेकर जनता में उत्साह
देश-विदेश से भक्त अयोध्या पहुंच रहे हैं।
किसी के लिए यह भावनाओं से जुड़ा पल है, किसी के लिए जीवनभर की प्रतीक्षा का अंत, तो किसी के लिए भगवान के दरबार में पहला नमन।
हर किसी के मन में बस यही विचार है
“अब हमारा अयोध्या फिर से जगमगा उठा है।”
Disclaimer
इस लेख में दी गई जानकारी धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ऐतिहासिक स्रोतों पर आधारित है। हम केवल आपको सूचना उपलब्ध करा रहे हैं। कृपया इसे इसी रूप में पढ़ें।
Ram Mandir Flag Hoisting – FAQ
1. Ram Mandir Flag Hoisting कब होगी?
Ram Mandir Flag Hoisting का कार्यक्रम 25 नवंबर 2025 को आयोजित किया जाएगा। इस दिन राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज की स्थापना होगी और पूरे देश में इसे उत्सव की तरह मनाया जाएगा।
2. Ram Mandir Flag Hoisting का क्या महत्व है?
Ram Mandir Flag Hoisting धर्म, विजय, शक्ति और सद्गुणों की स्थापना का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि सत्य और धर्म हमेशा विजयी होते हैं, ठीक उसी तरह जैसे भगवान श्रीराम ने अधर्म पर विजय प्राप्त की थी।
3. क्या Ram Mandir Flag Hoisting के मौके पर विशेष कार्यक्रम होंगे?
हाँ, Ram Mandir Flag Hoisting के अवसर पर विशेष पूजा, धार्मिक अनुष्ठान और विशाल स्वागत समारोह आयोजित किया जाएगा। प्रधानमंत्री सहित देश की कई प्रमुख हस्तियां इस आयोजन में उपस्थित होंगी।
4. अयोध्या की खोज किसने की थी?
ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उज्जयिनी के महान राजा विक्रमादित्य ने अयोध्या की खोज की थी। उन्होंने ही सबसे पहले भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनवाया था, जो आगे चलकर इतिहास में प्रसिद्ध हुआ।
5. क्या भक्त Ram Mandir Flag Hoisting समारोह में शामिल हो सकते हैं?
अधिकांश भक्त इस दिन अयोध्या में मौजूद रह सकते हैं, लेकिन Ram Mandir Flag Hoisting के मुख्य कार्यक्रम में सीमित आमंत्रित अतिथि शामिल होंगे। हालांकि बाकी लोग टीवी और लाइव प्रसारण के माध्यम से समारोह देख सकेंगे।