जिस समाज में बेटी को देवी कहकर पूजा जाता है, वहाँ एक और बेटी चिता से भी पहले जला दी गई — और इस बार जलने का कारण था वह रिवाज, जिसे हमने कब का छोड़ देना चाहिए था, पर छोड़ न सके — दहेज।
निक्की भाटी, मात्र 26 वर्ष की युवती, जली हुई देह और डरी हुई आत्मा के साथ अस्पताल पहुंचाई गई। उसने कहा — “गैस सिलेंडर फट गया था।” पर सच कभी चुप नहीं रहता, वह राख से भी उठता है। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, सामने आया वह चेहरा जो अब तक समाज नकाब में छुपाए बैठा था — सुनियोजित हत्या का चेहरा।
बहन ने खोला सारा भेद – निक्की भाटी की हत्या का सच
कंचन — निक्की की बहन — ने जो कहा, वह केवल एक एफआईआर नहीं, एक युग की शर्मनाक गवाही बन गई। आरोप था: पति विपिन भाटी, सास दया, ससुर सत्यवीर और देवर रोहित — चारों ने मिलकर निक्की को जला दिया।
और कारण? वही दहेज!
शादी तो 2016 में बिना दहेज के हुई थी, पर जैसे ही रिश्तों की मिठास खत्म हुई, रुपये और कार की मांग ने घर की दीवारों को कालिख से भर दिया — माँग थी ₹36 लाख और एक लग्ज़री कार।
सुनिए, क्या कहती है ज़मीन से उठी सच्चाई निक्की भाटी से संबंधित
पुलिस ने घटनास्थल से थिनर की खाली बोतल, एक लाइटर और झुलसी दीवारें बरामद कीं — ये सामान गवाही नहीं देते, पर सच्चाई चुप भी नहीं रहते।
CCTV फुटेज और बहन के रिकॉर्ड किए वीडियो में सुनाई देती है चीख — “ये क्या कर लिया…” — और बस, यहीं से शुरू हुआ न्याय की आग में तपने का संघर्ष।
जब पुलिस ने भागते दोषी को पकड़ा
विपिन — पति — भाग रहा था, शायद कायरता की राह पर। पर न्याय कभी थमता नहीं। मुठभेड़ हुई, गोली लगी, और फिर पुलिस की हिरासत में आ गया।

क्या यह अकेली घटना है?
नहीं, भारत में हर दिन औसतन बीस बेटियाँ दहेज की बलि चढ़ती हैं। निक्की की कहानी उन हज़ारों कहानियों में से एक है, लेकिन इस बार, समाज की आंखें खुलती लगती हैं।
समाज से प्रश्न
कब तक माँ-बाप अपनी बेटियों को विदा करते वक़्त मन में यह भय लेकर जिएँगे कि “क्या यह विदाई अंतिम है?”
कब तक बेटियाँ शगुन के पीछे छुपी दहशत झेलती रहेंगी?
पीड़िता के परिवार की पुकार
निक्की के माता-पिता और बहन ने न्याय के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है। पर क्या न्याय समय पर पहुँचेगा? या फिर एक और मामला अदालत की तारीखों में गुम हो जाएगा?