आज देश में अगर एक ऐसी एयरलाइन है जिसने अपनी टाइमिंग, सर्विस और भरोसे से लोगों का दिल जीता है, तो वो है इंडिगो। लेकिन इंडिगो के पीछे खड़े असली शख्स IndiGo Owner राहुल भाटिया उनकी कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं। लोग आज इंडिगो में हो रही क्राइसिस के बाद उनके बारें में और ज्यादा जानना चाह रहे हैं कि आखिर 28 की उम्र में सब कुछ खो देने वाला लड़का कैसे भारत की नंबर-1 एयरलाइन का मालिक बन गया?

इंडिगो क्राइसिस के बीच चर्चा में आए IndiGo Owner
पिछले कुछ दिनों से एयरपोर्ट्स पर अफरा-तफरी मची हुई है।
कहीं दिल्ली तो कहीं मुंबई और बेंगलुरु हर जगह इंडिगो की फ्लाइट कैंसिलेशन ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। करीब 2,000 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल हो चुकी हैं और इसी बीच इंडिगो के पीछे खड़े IndiGo Owner अचानक सुर्खियों में आ गए।
अब हर किसी के दिमाग में सिर्फ एक सवाल
आखिर ये राहुल भाटिया कौन हैं और कैसे बने देश की नंबर-1 एयरलाइन के बॉस?
राहुल भाटिया की शुरुआती जिंदगी — पढ़ाई, सपना और पहला झटका
IndiGo Owner राहुल भाटिया का जन्म 18 दिसंबर 1955, दिल्ली में हुआ। बचपन से पढ़ाई में तेज थे और आगे की पढ़ाई के लिए कनाडा चले गए। वहाँ से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली और दो साल IBM में भी काम किया।
प्लान था कि वापस भारत आकर अपनी खुद की टेलीकॉम कंपनी शुरू करेंगे।
लेकिन किस्मत की चाल देखो
न तो टेलीकॉम कंपनी का सपना पूरा हुआ…
न ही टीचिंग का शौक आगे बढ़ पाया।
इसी बीच पिता की तबीयत खराब हो गई और राहुल को फैमिली बिजनेस संभालना पड़ गया।
फैमिली बिजनेस में एंट्री… और फिर सबसे बड़ा धोखा
राहुल के पिता ट्रैवल एजेंसी चलाते थे और 1964 में 9 पार्टनर्स के साथ Delhi Express Airline शुरू की थी।
राहुल बिजनेस में आए तो उन्होंने कई सुधार किए, लेकिन 1991 में ऐसा झटका लगा जिसने उनकी दुनिया हिलाकर रख दी।
बिजनेस पार्टनर्स ने गुपचुप तरीके से स्टॉक खरीदकर उन्हें ही फैमिली बिजनेस से बाहर कर दिया।
सोचो
28 साल की उम्र…
खुद का नहीं, पिता का बिजनेस…
और उसी से निकाल दिया गया।
कोई भी होता तो टूट जाता, लेकिन यहीं से उनकी नई शुरुआत जन्म लेती है।
सिर्फ 15 लाख रुपए से बना InterGlobe – IndiGo Owner की असली शुरुआत
सब कुछ खत्म होने जैसा था, लेकिन राहुल भाटिया ने हार नहीं मानी।
उन्होंने 15 लाख रुपए से InterGlobe नाम की कंपनी शुरू की
जिसमें IT, BPO, ट्रैवल, हॉस्पिटैलिटी, ट्रांसपोर्टेशन जैसे कई सेक्टर शामिल थे।
धीरे-धीरे कंपनी ने पैर जमाए, लेकिन राहुल का सपना अभी पूरा नहीं हुआ था।
उन्हें एयरलाइन बिजनेस में वही मुकाम चाहिए था, जो उनके पिता कभी चाहते थे।
IndiGo कैसे बनी? — दो दिमाग, एक विज़न
2000 में उनकी मुलाकात IIT पास और एविएशन एक्सपर्ट राकेश गंगवाल से हुई।
दोनों का एयरलाइन शुरू करने का सपना एक जैसा था।
यही से शुरू होता है IndiGo Owner का मास्टरप्लान
- 2004 में एयरलाइन का प्लान तैयार
- 2006 में लाइसेंस मिला
- और उसी साल इंडिगो की पहली फ्लाइट ने उड़ान भरी
IndiGo की USP क्या थी?
- कम किराया
- साफ-सुथरा मॉडल
- समय पर उड़ान (On-time Performance)
धीरे-धीरे इंडिगो ने बाजार में ऐसी पकड़ बनाई कि 2012 तक भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन बन गई।
2019 में पार्टनरशिप में दरार
जैसा कि बिजनेस में अक्सर होता है
2019 में राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल के बीच मतभेद बढ़ गए।
कंपनी के ढांचे को लेकर दोनों की सोच अलग हो गई।
अंत में गंगवाल को बोर्ड से बाहर होना पड़ा।
लेकिन इंडिगो अपनी ग्रोथ पर कायम रही।
IndiGo Owner की नेटवर्थ — सादगी में छिपा बड़ा बिजनेस
IndiGo Owner राहुल भाटिया ग्लैमर और लाइमलाइट से दूर रहने वाले इंसान हैं।
मीटिंग्स में भी अक्सर साधारण शर्ट-पैंट में दिख जाते हैं।
ना कोई स्टाइल शौक…
ना मीडिया में दिखने का चस्का…
लेकिन बिजनेस?
उनकी नेटवर्थ लगभग 72,000 करोड़ रुपए बताई जाती है।
मतलब
मेहनत साइलेंट…
और रिजल्ट वायलेंट!
राहुल भाटिया के बड़े अचीवमेंट्स
- 2010 – EY Entrepreneur of The Year
- 2011 – Outstanding Startup Award
- 2012 – इंडिगो भारत की No.1 एयरलाइन बनी
- ब्लूमबर्ग अरबपति इंडेक्स के अनुसार भारत के 22वें सबसे अमीर व्यक्ति
निष्कर्ष — 28 में सब खोकर, 50 में भारत की No.1 एयरलाइन खड़ी की | ROZ KI BAAT
IndiGo Owner राहुल भाटिया की कहानी हमें यही सिखाती है
- जिंदगी में झटका किसी को भी लग सकता है
- लेकिन हार मान लेना अपनी हार को खुद बुलाने जैसा है
- 28 की उम्र में धोखे से सब छिन गया
- लेकिन उन्होंने 15 लाख से empire खड़ा कर दिया
- और आज भारत की नंबर-1 एयरलाइन IndiGo उन्हीं की देन है
उनकी स्टोरी हर उस इंसान को मोटिवेशन देती है जो जिंदगी में कभी गिरा हो या हार का सामना कर रहा हो।