कई बार सुबह उठते ही लगता है कि बस पाँच मिनट और सो लें। कुछ लोग कहते हैं, “आज बहुत थकान है”, तो कोई कहता है, “कल से काम शुरू करेंगे”। यही “कल से” वाला विचार धीरे-धीरे आलस्य को हमारी आदत बना देता है। अगर आप भी सोचते हैं कि how to overcome laziness, तो आइए जानते हैं – वो कौन-सी बातें हैं जिनसे हम आलस को हमेशा के लिए दूर कर सकते हैं और जीवन में सक्रियता ला सकते हैं।

खुद को समझिए – आलस कहाँ से आता है
आलस हमेशा शरीर से नहीं, मन से आता है। जब मन अस्थिर हो, लक्ष्य स्पष्ट न हो या उत्साह कम हो, तब हम सुस्ती महसूस करते हैं। इसलिए सबसे पहले खुद से ईमानदारी से पूछिए – “क्या मैं थका हूँ या बस टाल रहा हूँ?” यही समझ how to overcome laziness का पहला कदम है।
अपने दिन की एक सही शुरुआत करें
सुबह जल्दी उठना हर सफलता की जड़ है। अगर आप चाहते हैं कि दिनभर ऊर्जा बनी रहे, तो सुबह के पहले घंटे को सही बनाइए। उठते ही मोबाइल देखने के बजाय ठंडे पानी से चेहरा धोएँ, थोड़ा टहलें या ध्यान लगाएँ। ये छोटी-छोटी आदतें आपके भीतर से सक्रियता और आत्मविश्वास जगाती हैं।
लक्ष्य तय करें, पर छोटे-छोटे
कई बार हम बड़े-बड़े लक्ष्यों से घबरा जाते हैं और काम शुरू ही नहीं कर पाते। इसलिए काम को छोटे हिस्सों में बाँटिए। उदाहरण के लिए, “पूरी किताब आज खत्म करनी है” की जगह कहें, “पहले दस पेज पढ़ूँगा।” जब ये छोटे लक्ष्य पूरे होंगे, तो मन में खुशी आएगी और आलस खुद भाग जाएगा। यही असली तरीका है how to overcome laziness का।
काम के बीच थोड़ी-सी हरकत ज़रूरी है
घंटों एक ही जगह बैठना शरीर को सुस्त बना देता है। हर एक घंटे में पाँच मिनट के लिए उठिए, स्ट्रेच कीजिए या हल्की चाल में चलिए। इससे ब्लड सर्कुलेशन सही रहेगा और दिमाग भी एक्टिव रहेगा। अगर आप वर्क फ्रॉम होम करते हैं, तो यह आदत ज़रूर अपनाएँ।
मोबाइल और सोशल मीडिया पर नियंत्रण रखें
आज के समय में आलस्य का सबसे बड़ा कारण मोबाइल है। सोशल मीडिया की स्क्रॉलिंग हमारी ऊर्जा को खा जाती है। अगर आप सोचते हैं how to overcome laziness, तो सबसे पहले अपनी स्क्रीन टाइम कम करें। दिन में एक तय समय ही मोबाइल चलाएँ और बाकी समय खुद के विकास पर लगाएँ।
खानपान में सुधार करें
थकान और आलस का गहरा संबंध हमारे भोजन से भी होता है। तला-भुना, भारी खाना और मीठा ज़्यादा लेने से शरीर भारी महसूस करता है। इसलिए हल्का, पौष्टिक और संतुलित आहार लें। पर्याप्त पानी पिएँ, नींद पूरी करें और शरीर को फिट रखें — क्योंकि एक स्वस्थ शरीर ही सक्रिय मन को जन्म देता है।
ध्यान और व्यायाम का साथ
हर दिन कम से कम 15 मिनट ध्यान या योग करें। इससे मन शांत रहेगा, एकाग्रता बढ़ेगी और आलस कम होगा। व्यायाम से शरीर में रक्त संचार बढ़ता है और ऊर्जा स्वाभाविक रूप से महसूस होती है। याद रखिए, जो अपने शरीर का ख्याल रखता है, वही अपने लक्ष्यों तक पहुँचता है।
खुद को प्रेरित करते रहें
कभी-कभी बस एक प्रेरणादायक पंक्ति भी हमें काम करने के लिए तैयार कर देती है। खुद के लिए कोई छोटा-सा इनाम तय करें – जैसे, “अगर यह काम पूरा किया तो अपनी पसंदीदा चाय पियूँगा।” ऐसे छोटे-छोटे मोटिवेशन आपको हर दिन बेहतर बनाएँगे।
संगति का असर
आप किन लोगों के साथ रहते हैं, ये भी तय करता है कि आप आलसी बनेंगे या प्रेरित। अगर आप ऐसे लोगों से घिरे हैं जो हमेशा कुछ नया करते हैं, आगे बढ़ते हैं, तो आप भी वैसा ही सोचेंगे। इसलिए अपने आस-पास के माहौल को सकारात्मक बनाएँ।
याद रखिए – आलस एक आदत है, भाग्य नहीं
कई लोग यह सोचकर बैठ जाते हैं कि “मैं तो ऐसा ही हूँ” — पर सच्चाई यह है कि आलस सीखा गया व्यवहार है, जिसे हम चाहें तो बदल सकते हैं। हर सुबह खुद से कहिए — “आज मैं सक्रिय रहूँगा।” धीरे-धीरे यह आपका स्वभाव बन जाएगा।
निष्कर्ष – बदलाव की शुरुआत आज से
आलस्य हर उस व्यक्ति के जीवन में आता है जो सपने देखता है, लेकिन फर्क इस बात से पड़ता है कि कौन उस पर विजय पाता है। अगर आप सच में सोचते हैं कि how to overcome laziness, तो पहला कदम है — अभी से शुरू करना। क्योंकि “कल” कभी नहीं आता।
ROZ KI BAAT कहता है —
“जो आज को पकड़ लेता है, वही कल को अपने हक़ में बदल देता है।”
Final Tip:
हर सुबह खुद से एक वादा कीजिए – “आज मैं अपने आलस पर जीत पाऊँगा।” बस यही सोच आपकी जिंदगी बदल सकती है।