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दीपावली… सिर्फ दीप जलाने या मिठाई बाँटने का पर्व नहीं है। ये वो त्यौहार है जो हमारे अंदर के अंधकार को मिटाकर ज्ञान और भक्ति की रोशनी फैलाता है। Diwali Special का असली अर्थ है — अंधकार पर प्रकाश की विजय, असत्य पर सत्य की जीत और निराशा पर आशा का उदय।
ये पर्व हमें सिर्फ भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी की याद नहीं दिलाता, बल्कि उन महान आत्माओं के जीवन को भी याद करवाता है जिन्होंने अपने प्रकाश से समाज को दिशा दी।

भगवान श्रीराम और दीपों की महिमा
कहते हैं जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम चौदह वर्ष का वनवास पूरा कर रावण पर विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटे, तब नगरवासियों ने दीपों की पंक्तियाँ जलाकर उनका स्वागत किया था। तभी से दीपावली का पर्व मनाया जाता है।
पर सच तो ये है कि Diwali Special सिर्फ अयोध्या के दीपों की बात नहीं है, बल्कि हर उस हृदय की कहानी है जहाँ राम बसते हैं। जब-जब हम सत्य, प्रेम और मर्यादा को अपने जीवन में अपनाते हैं, तब-तब हमारे भीतर की दीपावली जल उठती है।
महावीर स्वामी और आत्मज्ञान की ज्योति
Diwali Special का संबंध जैन धर्म के प्रवर्तक भगवान महावीर स्वामी से भी जुड़ा हुआ है। इस दिन उन्हें निर्वाण प्राप्त हुआ था। वैशाली के राज परिवार में जन्मे वर्धमान (महावीर स्वामी) ने भौतिक सुख-सुविधाओं को त्यागकर आत्मज्ञान की राह चुनी।
उन्होंने हमें सिखाया —
“सच्चा प्रकाश बाहर के दीपों से नहीं, भीतर की आत्मा से निकलता है।”
ROZ KI BAAT यही कहती है कि जब मनुष्य अपने भीतर झाँकता है, तब उसे असली दिवाली का अर्थ समझ आता है — आत्मा का जागरण ही सच्ची रोशनी है।
गौतम बुद्ध और करुणा का दीपक
बौद्ध धर्म में भी Diwali Special का महत्व है। भगवान गौतम बुद्ध के अनुयायियों ने दीपावली के दिन दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। आज भी बौद्ध स्तूपों और मठों में दीप प्रज्वलित किए जाते हैं — करुणा, प्रेम और शांति के प्रतीक के रूप में।
बुद्ध का जीवन हमें सिखाता है कि जब तक हम दूसरों के दुख को अपना नहीं मानते, तब तक असली प्रकाश हमारे भीतर नहीं जल सकता।
स्वामी दयानंद सरस्वती: अंधविश्वास के अंधकार से संघर्ष
Diwali Special आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती की भी याद दिलाता है। उन्होंने समाज में फैले अंधविश्वास और पाखंड को दूर करने के लिए जीवन भर संघर्ष किया। उन्होंने कहा —
“सत्य को जानना और उस पर चलना ही सबसे बड़ी पूजा है।”
दीपावली के दिन ही स्वामी जी ने देह त्याग किया था। इसलिए यह दिन उनके प्रकाशपूर्ण विचारों को याद करने का भी दिन है।
स्वामी रामतीर्थ: आत्मबल का संदेश
वेदों के प्रकांड विद्वान स्वामी रामतीर्थ का जीवन भी Diwali Special का एक अमूल्य अध्याय है। उन्होंने ज्ञान, साहस और आत्मबल को ही सच्ची संपत्ति माना। संसार में रहकर भी वे वैराग्य के प्रतीक बने।
उन्होंने कहा था — “हर व्यक्ति अपने भीतर एक दीप है, बस उसे पहचानने की देर है।”
सच में, यही दीपावली का सार है।
गुरु हरगोबिंद जी और ‘बंदी छोड़ दिवस’
सिख धर्म में दीपावली बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाई जाती है। सिखों के छठे गुरु गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने ग्वालियर किले से स्वयं के साथ-साथ 52 राजाओं को भी मुक्त कराया था। जब वे अमृतसर लौटे, तब उनके स्वागत में हज़ारों दीप जलाए गए।
यह दृश्य इस बात का प्रतीक बना कि प्रकाश केवल दीपक का नहीं, स्वतंत्रता का भी होता है।
इसलिए Diwali Special सिख परंपरा में भी आज तक विशेष स्थान रखती है।
भगवान विश्वकर्मा: सृजन के देवता
दीपावली के अगले दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। वे देवताओं के शिल्पकार हैं — जिनके हाथों से स्वर्णपुरी लंका, द्वारका और इंद्रपुरी जैसी रचनाएँ बनीं।
शिल्पकार, इंजीनियर और कलाकार इस दिन अपने औजारों की पूजा करते हैं ताकि सृजन में नई ऊर्जा और सफलता मिले।
ROZ KI BAAT के अनुसार, सृजन भी एक प्रकार की आराधना है — जब हम अपने कर्म से समाज को रोशन करते हैं, वही असली दीपावली होती है।
दीपावली का असली संदेश
Diwali Special हमें यह सिखाता है कि दीप सिर्फ तेल से नहीं जलता, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और सदाचार से जलता है।
यह पर्व हमें याद दिलाता है कि धर्म सिर्फ पूजा-पाठ नहीं, बल्कि मन के अंधकार को मिटाने की साधना है।
हर व्यक्ति के भीतर एक दीप छिपा है, बस उसे जलाने की देर है।
और जब वो दीप जल उठता है, तब जीवन का हर अंधेरा मिट जाता है।
निष्कर्ष
दीपावली का त्यौहार सिर्फ भगवान राम की अयोध्या वापसी की कहानी नहीं, बल्कि यह कई महापुरुषों की जीवन यात्राओं का प्रतीक है।
महावीर का आत्मज्ञान, बुद्ध की करुणा, दयानंद का सत्य, गुरु हरगोबिंद की स्वतंत्रता और विश्वकर्मा का सृजन — यही सब मिलकर Diwali Special को पूर्ण बनाते हैं।
ROZ KI BAAT यही कहती है —
“दीपावली का असली अर्थ है — मन के अंधकार को मिटाकर आत्मा के प्रकाश से संसार को रोशन करना।”