कल मंगलवार को एक प्रतिष्ठित समाचार बना कि Dhirendra Krishna Shastri reached Vrindavan to meet Premanand Maharaj and sought support for padayatra।
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री अचानक वृंदावन पधारे और Premanand Maharaj से मिलकर उन्हें अपनी योजनाओं में सहयोग का आग्रह किया।

वृंदावन की यात्रा और मुलाकात
सुबह करीब सात बजे शास्त्री जी श्री राधा केलीकुंज आश्रम पहुँचे। वहाँ Premanand Maharaj ने उनका स्वागत किया, कुशलक्षेम पूछा और आपसी श्रद्धा-भरी बातचीत हुई।
Dhirendra Krishna Shastri reached Vrindavan to meet Premanand Maharaj इस खबर ने दर्शनार्थियों और भक्तों में हलचल मचा दी। शास्त्री जी ने इस अवसर पर पदयात्रा की योजना का ज़िक्र किया और सहयोग की अपील की।
पदयात्रा की योजना और उद्देश्य
उनका कहना था कि यह सनातन एकता पदयात्रा होगी, जिसमें दिल्ली से वृंदावन तक चलकर धार्मिक और सांस्कृतिक ऊर्जा का संचार करना है। वे चाहते हैं कि इस यात्रा में भक्त, समाज और धर्मप्रेमी साथ आएँ।
इस संदर्भ में कहा गया कि Dhirendra Krishna Shastri reached Vrindavan to meet Premanand Maharaj and sought support for padayatra — यानी यह मुलाकात केवल औपचारिक नमस्ते भर नहीं थी, बल्कि साथ मिलकर कुछ बड़ा आंदोलन शुरू करने की शुरुआत थी।
बातचीत के मुख्य बिंदु
मुलाकात के दौरान निम्न बातें सामने आईं:
- शास्त्री जी ने महाराज की तबीयत का हाल जाना और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर चिंता जताई।
- उन्होंने प्रकट किया कि इसी कारण वे पदयात्रा को लेकर आशंका कर रहे थे, लेकिन उन्होंने भरोसा दिया कि सबकुछ ठीक से होगा।
- Premanand Maharaj ने कहा कि वे भावरूप से इस यात्रा के साथ होंगे, और आशीर्वाद देने में पीछे नहीं रहेंगे।
- शास्त्री जी ने बताया कि इस यात्रा के ज़रिये भगवत नाम का प्रचार-प्रसार होगा, माया और मोह को दूर करने की शक्ति बढ़ेगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुलाकात?
- इस घटना को इसलिए भी देखा जा रहा है क्योंकि Dhirendra Krishna Shastri reached Vrindavan to meet Premanand Maharaj and sought support for padayatra — यह संकेत है कि धार्मिक आंदोलन अब अलग-अलग संस्थानों और संतों को जोड़कर आगे बढ़ने वाला है।
- यह यात्रा न सिर्फ आस्था की बल्कि एकता की पहल होगी — लोगों को जोड़ने और समाज में धार्मिक-संस्कृतिक चेतना जगाने का एक माध्यम बनेगी।
- इसके अलावा, इस मुलाकात ने भक्तों में विश्वास जगाया है कि पदयात्रा सिर्फ घोषणा नहीं, बल्कि आयोजन होगा, जिसमें संतों का आशीर्वाद और सक्रिय सहयोग शामिल होगा।
क्या आगे की योजना है?
मीडिया में बताया गया है कि पदयात्रा की तारीखें जल्द घोषित होंगी।
शास्त्री जी ने कहा कि मीडिया से उन्होंने इस बात पर चर्चा नहीं की, लेकिन इसका प्रचार-प्रसार धीरे-धीरे होगा।
भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस पदयात्रा में कितने लोग शामिल हो पाएँगे और किस तरह का सामाजिक और आध्यात्मिक प्रभाव पड़ेगा।
निष्कर्ष
इस पूरे प्रकरण में यही कहना उचित है कि Dhirendra Krishna Shastri reached Vrindavan to meet Premanand Maharaj and sought support for padayatra — यह सिर्फ एक सूचना नहीं, बल्कि एक संदेश है।
यह संदेश है — विभाजन और दूरी छोड़कर धर्म, संस्कृति और आस्था को एक सूत्र में बांधने का।
आरंभ में यह यात्रा छोटी सी दिख सकती है, लेकिन समय के साथ यह एक बड़ी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गाथा बन सकती है।
ROZ KI BAAT के नाम पर मैं यह कहूँगा — इस पहल की दिशा और परिणाम दोनों ही महत्वपूर्ण होंगे, और हमें इसे विचार और श्रद्धा दोनों के साथ देखना चाहिए।