Bhai Dooj 2025 : दिवाली के बाद भाई दूज कब है जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

भारत में भाई-बहन के रिश्ते को सबसे पवित्र और अनोखा माना गया है। भाई दूज ऐसा ही त्यौहार है जो दिवाली के तुरंत बाद मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। भाई भी अपनी बहनों को उपहार देकर उनके जीवन में खुशियाँ लाने का वचन देते हैं। इस बार का त्योहार खास है क्योंकि लोग पहले से ही जानना चाहते हैं कि Bhai Dooj 2025 Date और Shubh Muhurat क्या है।

आइए, आज हम जानते हैं भाई दूज 2025 की तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और इससे जुड़ी पौराणिक कथा विस्तार से।

Bhai Dooj 2025

Bhai Dooj 2025 Date और Shubh Muhurat

Bhai Dooj 2025 का त्योहार दिवाली के दो दिन बाद मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, भाई दूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आता है।

  • तिथि प्रारंभ : 22 अक्टूबर 2025, बुधवार को सुबह 11:07 बजे
  • तिथि समाप्त : 23 अक्टूबर 2025, गुरुवार को सुबह 08:52 बजे
  • भाई दूज पूजन का शुभ मुहूर्त : 22 अक्टूबर 2025 को दोपहर 01:00 बजे से 03:20 बजे तक शुभ समय है।

इस दिन बहनें अपने भाइयों को विधिवत तिलक करती हैं। शुभ मुहूर्त में तिलक करने से भाई के जीवन में सौभाग्य और समृद्धि आती है।


भाई दूज का पौराणिक महत्व और यमराज कथा

Bhai Dooj 2005 भाई दूज को लेकर कई पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं। इनमें सबसे प्रसिद्ध कथा यमराज और यमुनाजी से जुड़ी है।

कहा जाता है कि यमुनाजी अपने भाई यमराज को घर बुलाकर भोजन कराना चाहती थीं। जब यमराज उनके घर आए, तो यमुनाजी ने उन्हें प्रेमपूर्वक भोजन कराया और तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु की कामना की। यमराज प्रसन्न होकर बोले कि जो बहन इस दिन अपने भाई को तिलक करके भोजन कराएगी, उसके भाई की आयु लंबी होगी और उसे यमलोक का भय नहीं रहेगा। तभी से यह परंपरा शुरू हुई और भाई दूज को विशेष महत्व मिला।


भाई दूज की परंपरा और रीति-रिवाज

भाई दूज का त्योहार बहन-भाई के रिश्ते को मजबूत करने वाला पर्व है। इस दिन घरों में विशेष तैयारियाँ होती हैं।

  • सुबह स्नान कर बहनें अपने भाइयों के लिए थाली सजाती हैं।
  • थाली में रोली, चावल, दीपक, मिठाई और नारियल रखा जाता है।
  • भाई को आसन पर बैठाकर बहनें तिलक करती हैं और आरती उतारती हैं।
  • भाई अपनी बहनों को उपहार, पैसे या वस्त्र भेंट करते हैं।

कई जगहों पर Bhai Dooj 2005 भाई दूज को “भ्रातृ द्वितीया” भी कहा जाता है। खास बात यह है कि यह परंपरा सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि नेपाल में भी बड़े उत्साह से निभाई जाती है।


Bhai Dooj 2025 का सामाजिक और भावनात्मक महत्व

भाई दूज केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सामाजिक और भावनात्मक नजरिए से भी बेहद खास है।

  1. सामाजिक महत्व – भाई दूज पर परिवार के लोग एक साथ आते हैं। यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते को और भी मजबूत बनाता है।
  2. भावनात्मक महत्व – इस दिन भाई-बहन एक-दूसरे के प्रति अपना प्यार, विश्वास और जिम्मेदारी जताते हैं।
  3. सुरक्षा और आशीर्वाद का प्रतीक – भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है और बहन भाई की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ऐसे त्योहार रिश्तों में मिठास भरने का काम करते हैं।


Bhai Dooj 2025 : आधुनिक दृष्टिकोण

जहाँ पहले भाई दूज पर लोग एक-दूसरे से मिलकर यह त्योहार मनाते थे, वहीं अब डिजिटल युग में ऑनलाइन गिफ्ट्स और वर्चुअल तिलक की परंपरा भी शुरू हो गई है। दूर रहने वाले भाई-बहन वीडियो कॉल पर तिलक करके इस रिश्ते को जीवित रखते हैं।

ROZ KI BAAT के अनुसार, त्योहार का असली मकसद भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करना है। चाहे वह पारंपरिक तरीके से हो या आधुनिक अंदाज में।


निष्कर्ष

तो इस बार आप भी दिवाली के बाद अपने कैलेंडर में नोट कर लें कि Bhai Dooj 2025 Date और Shubh Muhurat 22 अक्टूबर 2025 को है। भाई दूज का महत्व सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भाई-बहन के रिश्ते की गहराई और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी को दर्शाता है।

भाई दूज की यमराज कथा हमें यह सिखाती है कि बहन का स्नेह और भाई का प्यार जीवनभर सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक होता है। इसलिए, इस भाई दूज पर अपने रिश्तों में नई ऊर्जा भरें और इसे पूरे उत्साह के साथ मनाएँ।

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