Mokshada Ekadashi 2025: मोक्षदा एकादशी की पूजा विधि, मंत्र, मुहूर्त और पूरी डिटेल

Mokshada Ekadashi 2025 हिंदू धर्म की उन महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक है, जिसका महत्व हर धर्म ग्रंथ में विस्तार से बताया गया है। अगहन माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली यह एकादशी सिर्फ व्रत का दिन नहीं होती, बल्कि मोक्ष और भक्ति का एक खास अवसर मानी जाती है। इस तिथि का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का दिव्य ज्ञान दिया था। इसलिए इसे “गीता जयंती” भी कहा जाता है।

इस वर्ष Mokshada Ekadashi 2025 का व्रत 1 दिसंबर, सोमवार को रखा जाएगा। इस शुभ दिन पर भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और गीता का पाठ करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है। ROZ KI BAAT के इस आर्टिकल में हम आपको मोक्षदा एकादशी का पूरा महत्व, पूजा-विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और व्रत नियम की हर डिटेल आसान भाषा में बता रहे हैं।

Mokshada Ekadashi 2025
Mokshada Ekadashi 2025: मोक्षदा एकादशी की पूजा विधि, मंत्र, मुहूर्त और पूरी डिटेल

मोक्षदा एकादशी 2025 कब है?

इस वर्ष मोक्षदा एकादशी सोमवार, 1 दिसंबर 2025 को पड़ेगी। सोमवार का दिन खुद शिव और विष्णु भक्तों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है, जिससे इस एकादशी का प्रभाव और बढ़ जाता है।


मोक्षदा एकादशी 2025 के शुभ मुहूर्त (Mokshada Ekadashi 2025 Shubh Muhurat)

● सुबह 06:55 से 08:15 तक
● सुबह 09:35 से 10:55 तक
● दोपहर 11:54 से 12:37 तक (अभिजीत मुहूर्त)
● दोपहर 01:35 से 02:56 तक
● शाम 04:16 से 05:36 तक

इन मुहूर्तों में पूजा करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।


मोक्षदा एकादशी का महत्व (Importance of Mokshada Ekadashi 2025)

Mokshada Ekadashi 2025 को मोक्ष और पापों के नाश का पर्व माना गया है। मान्यता है कि

इस दिन व्रत करने से माता-पिता और पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
भगवान विष्णु व्यक्ति के जीवन से संकट दूर करते हैं।
गीता पाठ करने से मन, मस्तिष्क और विचारों की शुद्धि होती है।
यह व्रत इंसान को जन्म–मरण के चक्र से मुक्ति दिलाता है।

ROZ KI BAAT की मानें, तो यह व्रत किसी भी व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति को बढ़ाने के लिए बेहद प्रभावी है।


मोक्षदा एकादशी की पूजा विधि (Mokshada Ekadashi 2025 Puja Vidhi)

व्रत से एक दिन पहले की तैयारी (30 नवंबर)

● सात्विक भोजन करें
● लहसुन–प्याज का उपयोग न करें
● जमीन पर सोएं
● ब्रह्मचर्य का पालन करें
● मन में भगवान के प्रति श्रद्धा रखें


व्रत वाले दिन (1 दिसंबर 2025)

● सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
● व्रत-संकल्प लें
● यदि संभव हो, निर्जला व्रत करें
● जरूरत पड़ने पर फलाहार ले सकते हैं


घरेलू पूजा की तैयारी

● घर में साफ स्थान चुनें
● गंगाजल छिड़ककर जगह पवित्र करें
● लकड़ी का पटिया रखें
● श्रीकृष्ण या विष्णु जी की मूर्ति/चित्र स्थापित करें


पूजा कैसे करें? (Step-by-Step)

शुभ मुहूर्त में दीपक जलाएं
भगवान को रोली, चंदन, कुंकुम, अक्षत आदि अर्पित करें
फूल चढ़ाएं
तुलसी दल अवश्य अर्पित करें
माखन-मिश्री, केले, फलों का भोग लगाएं
मंत्रों का जाप करें


मोक्षदा एकादशी मंत्र (Mokshada Ekadashi Mantra)

पूजा के समय लगातार यह मंत्र जाप करें—

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
या
“कृं कृष्णाय नमः”

इन मंत्रों का जाप मन की शुद्धि और आध्यात्मिक शक्ति के लिए सर्वोत्तम माना गया है।


रात की साधना और अगले दिन पारण

● रात में भजन-कीर्तन करें
● गीता के अध्याय पढ़ें
● व्रत का पारण 2 दिसंबर को सुबह करें
● किसी ब्राह्मण को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दें
● इसके बाद स्वयं भोजन करें

ऐसा माना जाता है कि इससे पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।


मोक्षदा एकादशी का फल

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार—
परिवार में शांति आती है
पूर्वजों की आत्मा को मोक्ष मिलता है
जीवन में पापों का नाश होता है
मन की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं

ROZ KI BAAT के अनुसार यह व्रत उन लोगों को अवश्य करना चाहिए जो जीवन में आध्यात्मिक प्रगति और मानसिक शांति पाना चाहते हैं।


Disclaimer:

यह जानकारी धार्मिक ग्रंथों और आचार्यों से ली गई है। इसका उद्देश्य केवल सूचना उपलब्ध कराना है। इसे अंतिम सत्य न मानें, अपने व्यक्तिगत निर्णय स्वयं लें।

FAQs

1. Mokshada Ekadashi 2025 कब है?

Mokshada Ekadashi 2025 का व्रत इस साल 1 दिसंबर, सोमवार को रखा जाएगा। इसी दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है।


2. मोक्षदा एकादशी का क्या महत्व है?

इस दिन व्रत रखने से पापों का नाश होता है, पूर्वजों को मोक्ष मिलता है और जीवन में शांति आती है। यह एकादशी गीता ज्ञान से जुड़ी होने के कारण बहुत शुभ मानी जाती है।


3. Mokshada Ekadashi 2025 की पूजा कैसे करें?

सुबह स्नान करके व्रत-संकल्प लें, श्रीकृष्ण की पूजा करें, मंत्र जाप करें और भगवान को माखन-मिश्री तथा फल अर्पित करें। रात में कीर्तन या गीता पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है।


4. मोक्षदा एकादशी का मुख्य मंत्र क्या है?

इस दिन “कृं कृष्णाय नमः” और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप सबसे शुभ माना जाता है।


5. व्रत का पारण कब किया जाता है?

व्रत का पारण अगले दिन 2 दिसंबर की सुबह ब्राह्मण भोजन और दान-दक्षिणा के बाद किया जाता है।

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