Mokshada Ekadashi 2025: कब है मोक्षदा एकादशी, 1 या 2 दिसंबर? क्यों है ये सबसे खास?

हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व है। सालभर में कुल 24 एकादशी आती हैं, लेकिन इन सभी में से जो सबसे अधिक शुभ, फलदायी और मोक्ष प्रदान करने वाली मानी गई है, वह है Mokshada Ekadashi 2025। धर्म ग्रंथों में इस एकादशी को ऐसा व्रत बताया गया है, जिसे करने से न केवल जीवन में पापों का क्षय होता है, बल्कि पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति का वरदान भी मिलता है। यही कारण है कि इसे “मोक्ष दिलाने वाली एकादशी” कहा गया है।

इस बार Mokshada Ekadashi 2025 को लेकर लोगों में यह भ्रम है कि यह 1 दिसंबर को पड़ेगी या 2 दिसंबर को। पंचांग के अनुसार इसकी सही तिथि और महत्व को समझना अत्यंत जरूरी है।

Mokshada Ekadashi 2025
Mokshada Ekadashi 2025: कब है मोक्षदा एकादशी, 1 या 2 दिसंबर? क्यों है ये सबसे खास?

Mokshada Ekadashi 2025 कब है?

पंचांग के अनुसार अगहन (मार्गशीर्ष) मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 30 नवंबर 2025, रविवार की रात 09:29 मिनट से शुरू होगी और 01 दिसंबर 2025, सोमवार की शाम 07:01 मिनट तक चलेगी।

क्योंकि एकादशी का सूर्योदय 1 दिसंबर को पड़ रहा है, इसलिए शास्त्रों के अनुसार Mokshada Ekadashi 2025 का व्रत 1 दिसंबर 2025 को किया जाएगा।

ठीक सूर्योदय पर एकादशी होने से इस व्रत का पुण्य और अधिक बढ़ जाता है। इस दिन कई शुभ योग भी बनेंगे, जिससे व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है।


क्यों सबसे खास है Mokshada Ekadashi 2025?

मोक्षदा एकादशी का महत्व केवल व्रत या पूजा तक सीमित नहीं है। इसका संबंध सीधे गीता उपदेश से है। धर्म ग्रंथों के अनुसार—

जब महाभारत युद्ध शुरू होने ही वाला था और अर्जुन युद्ध करने से इंकार कर चुके थे, उस समय भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें जीवन, धर्म, कर्म, भक्ति और मोक्ष का उपदेश दिया। यह उपदेश बाद में “श्रीमद्भगवद् गीता” के रूप में प्रसिद्ध हुआ।

महत्वपूर्ण बात यह है कि यह उपदेश मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी के दिन दिया गया था।

इसी कारण यह एकादशी—

✔ धर्म
✔ अध्यात्म
✔ मोक्ष
✔ भक्ति

चारों का अद्भुत संगम मानी जाती है।

और यही कारण है कि Mokshada Ekadashi 2025 को वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में गिना जाता है।


मोक्षदा एकादशी नाम कैसे पड़ा?

विद्वानों के अनुसार, श्रीकृष्ण द्वारा दिया गया गीता उपदेश मनुष्य के जीवन का मार्गदर्शन करता है।
गीता में बताए गए उपदेशों का पालन करके कोई भी व्यक्ति—

  • मोह-माया से मुक्त हो सकता है
  • जीवन का सत्य समझ सकता है
  • और अंततः मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है

इसलिए जिस एकादशी पर यह दिव्य ज्ञान संसार को प्राप्त हुआ, उसे “मोक्ष” प्रदान करने वाली एकादशी कहा गया और तब से इस तिथि को मोक्षदा एकादशी के नाम से जाना गया।

श्रद्धापूर्वक किया गया Mokshada Ekadashi 2025 का व्रत मनुष्य को जन्म-जन्मांतरों के पापों से मुक्त करने वाला माना गया है। इस दिन की पूजा और कथा श्रवण से पूर्वजों को भी मोक्ष मिलने का वरदान बताया गया है।


Mokshada Ekadashi 2025 का महत्व (Significance)

ROZ KI BAAT के अनुसार, यह एकादशी इन कारणों से जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है—

पापों से मुक्ति

शास्त्रों में लिखा है कि ऋषि, मुनि और देवता भी इस दिन व्रत करके पापों के नाश का वरदान प्राप्त करते हैं।

पूर्वजों को मोक्ष

यह एकादशी पितरों की मुक्ति के लिए सर्वोत्तम तिथि मानी गई है।

गीता जयंती

इस दिन गीता का अवतरण हुआ था, इसलिए इस तिथि की आध्यात्मिक शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।

भगवान विष्णु की विशेष कृपा

इस दिन श्रीकृष्ण और श्रीहरि विष्णु दोनो की संयुक्त पूजा का पुण्य प्राप्त होता है।

मनोकामना पूर्ण

व्रत, पूजा, दान और ध्यान से जीवन में मनोकामनाओं की पूर्ति के योग बनते हैं।


Mokshada Ekadashi 2025 व्रत विधि

इस एकादशी का व्रत नियम, संयम और पवित्रता के साथ किया जाता है।

प्रातः स्नान

सूर्योदय से पहले स्नान करके व्रत का संकल्प लें।

भगवान विष्णु की पूजा

  • पीले वस्त्र
  • तुलसी दल
  • धूप-दीप
  • गंगाजल
  • पंचामृत

से श्रीहरि विष्णु का अभिषेक करें।

गीता पाठ

आज के दिन गीता का पाठ या गीता के किसी भी अध्याय का श्रवण अत्यंत शुभ माना जाता है।

उपवास

शुद्ध फलाहार के साथ व्रत रखें।
यदि संभव हो तो निर्जला व्रत भी कर सकते हैं।

दान-पुण्य

आज के दिन भोजन, कपड़ा, और पीला अन्न दान करने से कई गुना फल मिलता है।


मोक्षदा एकादशी की पौराणिक कथा

धर्म ग्रंथों में एक राजा वल्लभ और उनके पिता की कथा आती है।
राजा ने सपने में अपने दिवंगत पिता को नरक में कष्ट झेलते देखा।
राजा दुखी होकर ऋषि पर्वत के पास गए।
ऋषि ने बताया कि मोक्षदा एकादशी का व्रत करके इसका पुण्य अपने पिता को दान कर दें।
राजा ने व्रत किया और पूरा पुण्य अपने पिता को समर्पित कर दिया।

परिणाम—
उनके पिता को तत्काल मोक्ष मिल गया।

इसीलिए कहा गया है कि—

“मोक्षदा एकादशी व्रत पितरों के लिए वरदान है।”


Mokshada Ekadashi 2025: पूजा के समय बनेंगे शुभ योग

1 दिसंबर 2025 को एकादशी के दिन कई शुभ योग होने के कारण यह तिथि और भी अधिक फलदायी मानी गई है।
इन योगों में पूजा करने का फल कई गुना बढ़ जाता है।


ROZ KI BAAT का संदेश

Mokshada Ekadashi 2025 केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मज्ञान, पवित्रता और मोक्ष का मार्ग है।
गीता उपदेश का महत्व समझकर यदि इस एकादशी पर सच्चे मन से पूजा की जाए, तो जीवन में शांति, ज्ञान और दिव्यता का संचार होता है।


Disclaimer

इस आर्टिकल में दी गई जानकारी धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों के अनुसार तैयार की गई है। ROZ KI BAAT केवल इस जानकारी को आप तक पहुँचाने का माध्यम है। इसे धार्मिक सूचना के रूप में ही देखें।

Mokshada Ekadashi 2025 – FAQ

1. Mokshada Ekadashi 2025 कब है?

Mokshada Ekadashi 2025 का व्रत 1 दिसंबर 2025, सोमवार को रखा जाएगा क्योंकि इस दिन सूर्योदय एकादशी तिथि पर होगा।


2. Mokshada Ekadashi 2025 का व्रत किसे करना चाहिए?

जो व्यक्ति पापों से मुक्ति, पूर्वजों की शांति और मोक्ष की कामना रखते हैं, उन्हें Mokshada Ekadashi 2025 का व्रत अवश्य करना चाहिए। यह व्रत सभी पुरुष, महिलाएँ और युवा कर सकते हैं।


3. Mokshada Ekadashi 2025 पर क्या पूजा करनी चाहिए?

इस दिन भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा, तुलसी दल अर्पण, गीता पाठ, दीपदान और दान-पुण्य करना सर्वोत्तम माना जाता है। इससे व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।


4. Mokshada Ekadashi 2025 का महत्व इतना अधिक क्यों है?

क्योंकि इसी तिथि पर भगवान कृष्ण ने अर्जुन को भगवद् गीता का उपदेश दिया था। इसलिए Mokshada Ekadashi 2025 अन्य एकादशियों से अधिक पवित्र और मोक्ष प्रदान करने वाली मानी जाती है।


5. Mokshada Ekadashi 2025 के दिन क्या नहीं करना चाहिए?

इस दिन मांस, मदिरा, प्याज-लहसुन, झूठ, क्रोध, तामसिक भोजन और किसी भी प्रकार के निषिद्ध कार्यों से दूर रहें। व्रत का पालन पवित्रता और संयम के साथ करना चाहिए।

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