Ekadashi 2026 Dates – हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत ही खास महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। हर महीने दो बार एकादशी आती है एक शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में। साल 2026 में कुल 24 एकादशियां पड़ेंगी। हर एक एकादशी का अपना अलग धार्मिक, आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व है।
कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से एकादशी व्रत करता है, उसके सारे पाप मिट जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

साल 2026 की सभी 24 एकादशियों की तिथियां (Ekadashi 2026 Dates List)
14 जनवरी (बुधवार) – षटतिला एकादशी
29 जनवरी (गुरुवार) – जया/भामी एकादशी
13 फरवरी (शुक्रवार) – विजया एकादशी
27 फरवरी (शुक्रवार) – आमलकी एकादशी
15 मार्च (रविवार) – पापमोचनी एकादशी
28 मार्च (शनिवार) – शुक्ल एकादशी
26 अप्रैल (रविवार) – वरूथिनी एकादशी
27 मई (मंगलवार) – अपरा एकादशी
10 जून (बुधवार) – निर्जला एकादशी
24 जुलाई (शुक्रवार) – कामिका एकादशी
23 अगस्त (रविवार) – अजा एकादशी
21 सितम्बर (सोमवार) – इंदिरा एकादशी
21 अक्टूबर (बुधवार) – रमा एकादशी
4 नवंबर (शुक्रवार) – उत्पन्ना एकादशी
20 नवंबर (शुक्रवार) – पापांकुशा एकादशी
19 दिसंबर (शनिवार) – मोक्षदा एकादशी
30 दिसंबर (बुधवार) – पौष पुत्रदा एकादशी
साल 2026 में ये सभी Ekadashi 2026 Dates बहुत शुभ और पवित्र मानी जा रही हैं। इन दिनों भगवान विष्णु की विशेष पूजा और उपवास से व्यक्ति को आत्मिक शांति और शुभ फल प्राप्त होते हैं।
एकादशी पूजा का महत्व (Importance of Ekadashi 2026 Dates)
हिंदू धर्म के अनुसार, एकादशी व्रत को सबसे पवित्र व्रतों में से एक माना गया है। यह दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का श्रेष्ठ दिन होता है। कहा जाता है कि इस व्रत को पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता दूर होती है और घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
एकादशी व्रत के दौरान व्यक्ति अन्न का त्याग करता है, जिससे शरीर की शुद्धि होती है। धार्मिक दृष्टि से यह आत्मा की पवित्रता का प्रतीक है और वैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है।
भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए भक्त इस दिन विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ और व्रत कथा सुनते हैं। ऐसा माना जाता है कि एकादशी के दिन किया गया दान और भक्ति सामान्य दिनों से कई गुना अधिक फल देता है।
एकादशी पूजा विधि (Ekadashi 2026 Vrat Vidhi)
- प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
- एकादशी के दिन अन्न, चावल और दाल का सेवन न करें, केवल फलाहार करें।
- भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं और चंदन, फूल, तुलसी पत्र, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
- पूरे दिन शांत मन से भगवान का स्मरण करें और असत्य, क्रोध व नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
- अगले दिन द्वादशी को स्नान कर भगवान विष्णु को भोग लगाकर और दान देकर व्रत का पारण करें।
एकादशी व्रत के लाभ
- पापों का नाश होता है।
- मन और शरीर दोनों की शुद्धि होती है।
- जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
- मानसिक एकाग्रता और आत्मबल बढ़ता है।
- भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
Disclaimer (ROZ KI BAAT)
इस आर्टिकल में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथों, पुराणों और विद्वानों की मान्यताओं पर आधारित है। ROZ KI BAAT का उद्देश्य केवल इस जानकारी को आप तक पहुंचाना है। इसे आस्था और जानकारी के रूप में ही लें।
निष्कर्ष:
Ekadashi 2026 Dates के अनुसार आने वाले साल में 24 पवित्र एकादशियां पड़ेंगी। हर एक एकादशी भगवान विष्णु की आराधना के लिए एक खास अवसर है। जो भी व्यक्ति पूरे विश्वास, भक्ति और अनुशासन के साथ इन व्रतों का पालन करता है, उसे भगवान विष्णु की कृपा अवश्य मिलती है और जीवन में शुभता आती है।
FAQs – Ekadashi 2026 Dates
1. साल 2026 में कुल कितनी एकादशियां होंगी?
साल 2026 में कुल 24 एकादशियां होंगी। हर महीने दो एकादशियां आती हैं — एक शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में।
2. एकादशी व्रत का क्या महत्व है?
एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। माना जाता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति के सारे पाप मिट जाते हैं, मन की शुद्धि होती है और जीवन में सुख-शांति बढ़ती है।
3. एकादशी के दिन क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?
एकादशी के दिन अन्न, चावल और दाल का सेवन नहीं किया जाता। इस दिन केवल फल, दूध, सूखे मेवे या साबूदाने जैसे फलाहारी भोजन ही लेना चाहिए।
4. एकादशी व्रत की पूजा कैसे करनी चाहिए?
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें, भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें। पूरे दिन भक्ति और ध्यान में रहें, और अगले दिन दान देकर व्रत खोलें।
5. एकादशी व्रत के क्या लाभ हैं?
एकादशी व्रत करने से मानसिक एकाग्रता बढ़ती है, शरीर से नकारात्मक ऊर्जा निकलती है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत व्यक्ति के जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति लाता है।