Kantara Chapter 1 Movie Review में हम बात कर रहे हैं उस फिल्म की, जिसने एक बार फिर दिखा दिया कि भारतीय सिनेमा में कहानी और संस्कृति अगर सही तरीके से दिखाई जाए, तो दर्शक खुद उससे जुड़ जाते हैं। ऋषभ शेट्टी ने जीता दिल, एक्शन सीन दमदार; बीच में भटके पर क्लाइमैक्स ने संभाला — यही लाइन पूरी फिल्म का सार है।

कहानी की शुरुआत
फिल्म की कहानी हमें लेकर जाती है कदंब वंश के समय में, जहाँ एक राजा और एक साधारण जनजाति के बीच संघर्ष दिखाया गया है।
Kantara Chapter 1 Movie Review के मुताबिक कहानी की जड़ें धरती, धर्म और परंपरा से जुड़ी हैं।
ऋषभ शेट्टी ने इस बार “वर्मे” का किरदार निभाया है — जो न सिर्फ योद्धा है बल्कि अपने गांव और संस्कृति का रक्षक भी है।
गांव के लोगों की आस्था, राजा का अहंकार और देवशक्ति का टकराव – यही फिल्म की असली आत्मा है। हर सीन में आपको लगेगा कि यह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक भावना है।
एक्शन सीन दमदार
अगर बात करें एक्शन की, तो कहना पड़ेगा कि ऋषभ शेट्टी ने जीता दिल, एक्शन सीन दमदार; बीच में भटके पर क्लाइमैक्स ने संभाला।
जंगल, आग, ढोल और पारंपरिक हथियारों के साथ फिल्म का हर एक्शन सीन स्क्रीन पर जादू बिखेरता है।
ऋषभ शेट्टी के एक्सप्रेशन, उनकी बॉडी लैंग्वेज और लोक शैली के एक्शन मूव्स ने दर्शकों को सीट से बांध कर रखा।
फाइट सीन में न तो ओवरडोज है और न ही बनावटीपन। Kantara Chapter 1 Movie Review सब कुछ इतना असली लगता है कि जैसे आप खुद वहां खड़े हैं।
अभिनय और डायरेक्शन
ऋषभ शेट्टी इस बार एक्टर के साथ-साथ निर्देशक के तौर पर भी छा गए हैं। उन्होंने फिल्म के हर फ्रेम में अपनी आत्मा झोंक दी है।
“वर्मे” का किरदार गुस्सा भी करता है, टूटता भी है, और अंत में देवता की तरह उठता है। यही किरदार का जादू है।
रुक्मिणी वसंथ ने अपनी मौजूदगी से फिल्म में गहराई भरी है। उनके संवाद भले कम हैं, पर हर सीन में भावनाएँ झलकती हैं।
साथ ही विरोधी किरदार की एंट्री कहानी को और रोचक बना देती है।
डायरेक्शन की बात करें तो ऋषभ ने एक लोककथा को सिनेमाई भाषा में बेहद खूबसूरती से ढाला है। उन्होंने दिखा दिया कि भारतीय मिट्टी की कहानियाँ भी विश्वस्तरीय हो सकती हैं।
विजुअल्स और म्यूजिक
फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण इसका विजुअल ट्रीटमेंट है।
हरे-भरे जंगल, मिट्टी की खुशबू और देवी-देवताओं की रहस्यमयी ऊर्जा को कैमरे ने शानदार तरीके से कैद किया है।
BGM यानी बैकग्राउंड म्यूजिक में वही लोक साउंड है जो Kantara की पहचान बन चुकी है।
ढोल-नगाड़ों की गूंज और क्लाइमेक्स का म्यूजिक – ये दोनों आपकी रूह तक उतर जाते हैं।
बीच में भटकाव, लेकिन क्लाइमेक्स ने सब संभाला
फिल्म का पहला हिस्सा थोड़ा धीमा है। कुछ सीन ज़रूरत से ज़्यादा खींचे गए हैं, और कई जगह कहानी एक लूप में फँसी लगती है।
पर जैसे-जैसे क्लाइमेक्स नज़दीक आता है, सब कुछ बदल जाता है।
अंतिम 20 मिनट फिल्म की जान हैं — यहाँ कहानी अपने उच्चतम भाव तक पहुँचती है।
ऋषभ शेट्टी ने जीता दिल, एक्शन सीन दमदार; बीच में भटके पर क्लाइमैक्स ने संभाला, यह लाइन बिल्कुल सही बैठती है क्योंकि क्लाइमेक्स वो हिस्सा है जहाँ पूरी फिल्म का प्रभाव गहराई से महसूस होता है।
संदेश और भावना
Kantara सिर्फ एक फिल्म नहीं है, ये हमें यह याद दिलाती है कि जब इंसान अपनी जड़ों से जुड़ा होता है तो उसे कोई हिला नहीं सकता।
फिल्म यह संदेश देती है कि प्रकृति, आस्था और संस्कृति का सम्मान ही असली धर्म है।
Roz Ki Baat का Verdict
Kantara Chapter 1 Movie Review के अनुसार ये फिल्म एक Visual Experience है जिसे मिस नहीं किया जाना चाहिए।
ऋषभ शेट्टी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय सिनेमा में “देसी रूट्स” वाली कहानियों की ताकत सबसे बड़ी है।
🔑 निष्कर्ष
अगर आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं जिनमें परंपरा, भक्ति और एक्शन तीनों का मेल हो, तो Kantara Chapter 1 आपके लिए ही बनी है।
यह फिल्म बताती है कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मा से जुड़ने का माध्यम भी हो सकता है।
ऋषभ शेट्टी ने जीता दिल, एक्शन सीन दमदार; बीच में भटके पर क्लाइमैक्स ने संभाला, और यही वजह है कि Kantara Chapter 1 साल 2025 की सबसे यादगार फिल्मों में से एक बन गई है।