हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को अत्यंत पवित्र माना गया है। साल भर में आने वाली 24 एकादशियों में माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है। धर्म ग्रंथों में बताया गया है कि Jaya Ekadashi 2026 का व्रत करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। इस एकादशी को अजा और भीष्म एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत का महत्व स्वयं भगवान शिव ने महर्षि नारद को बताया था। ROZ KI BAAT के इस विशेष लेख में हम आपको बताएंगे कि Jaya Ekadashi 2026 का व्रत कब रखा जाएगा, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है, सही पूजा विधि कौन-सी है और किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

कब है जया एकादशी 2026? (Kab Hai Jaya Ekadashi 2026)
पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 28 जनवरी 2026, बुधवार को शाम 04 बजकर 36 मिनट से प्रारंभ होगी और 29 जनवरी 2026, गुरुवार को दोपहर 01 बजकर 55 मिनट तक रहेगी।
चूंकि एकादशी तिथि का सूर्योदय 29 जनवरी को हो रहा है, इसलिए Jaya Ekadashi 2026 का व्रत गुरुवार, 29 जनवरी 2026 को ही रखा जाएगा। यही तिथि धार्मिक रूप से मान्य मानी जाएगी।
जया एकादशी 2026 के शुभ मुहूर्त
जया एकादशी के दिन पूजा और व्रत के लिए कई शुभ समय बताए गए हैं। श्रद्धालु अपनी सुविधा अनुसार इनमें से किसी भी मुहूर्त में पूजा कर सकते हैं।
- सुबह 11:17 से दोपहर 12:39 तक
- दोपहर 12:39 से 02:01 तक
- दोपहर 02:01 से 03:23 तक
- शाम 06:07 से 07:45 तक
- शाम 07:45 से 09:23 तक
इन शुभ मुहूर्तों में भगवान विष्णु की पूजा करने से Jaya Ekadashi 2026 का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
जया एकादशी का धार्मिक महत्व
धर्म ग्रंथों के अनुसार, जया एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को प्रेत योनि, नकारात्मक शक्तियों और दुर्भाग्य से मुक्ति मिलती है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को विधिपूर्वक करने से पिछले जन्मों के पाप भी नष्ट हो जाते हैं।
Jaya Ekadashi 2026 का व्रत खासतौर पर उन लोगों के लिए बहुत फलदायी माना जाता है, जो मानसिक अशांति, बाधाओं या जीवन में बार-बार असफलताओं का सामना कर रहे हैं। यह व्रत जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाला माना गया है।
जया एकादशी 2026 की पूजा विधि
ROZ KI BAAT के अनुसार, जया एकादशी की पूजा विधि सरल लेकिन नियमबद्ध होती है।
- 29 जनवरी की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- हाथ में जल, चावल और फूल लेकर एकादशी व्रत का संकल्प लें।
- पूजा स्थान को साफ करके गंगाजल से शुद्ध करें।
- लकड़ी की चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- भगवान को कुमकुम का तिलक लगाएं और पुष्प अर्पित करें।
- घी का दीपक जलाएं और धूप-दीप से पूजा करें।
- इस व्रत में तिल अर्पित करने का विशेष महत्व होता है।
- पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करते रहें।
- भगवान को तुलसी दल सहित भोग अर्पित करें।
- अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
इस विधि से पूजा करने पर Jaya Ekadashi 2026 का व्रत पूर्ण माना जाता है।
व्रत के नियम और पारण विधि
जया एकादशी के दिन अन्न ग्रहण नहीं किया जाता। कुछ भक्त फलाहार करते हैं, जबकि कुछ निर्जला व्रत भी रखते हैं। रात में जागरण कर भगवान विष्णु का स्मरण करना विशेष फलदायी माना गया है।
अगले दिन यानी 30 जनवरी की सुबह द्वादशी तिथि में व्रत का पारण किया जाता है। पारण के बाद ही भोजन करना चाहिए। ऐसा करने से Jaya Ekadashi 2026 का पूरा पुण्य प्राप्त होता है।
जया एकादशी से जुड़ी पौराणिक कथा
पुराणों में वर्णन मिलता है कि प्राचीन काल में गंधर्व और अप्सराओं को इस व्रत के प्रभाव से श्राप से मुक्ति मिली थी। भगवान विष्णु की कृपा से वे पुनः अपने दिव्य स्वरूप को प्राप्त कर सके। यही कारण है कि Jaya Ekadashi 2026 को मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी भी कहा जाता है।
क्यों खास है जया एकादशी 2026?
इस वर्ष जया एकादशी का संयोग अत्यंत शुभ माना जा रहा है। ग्रहों की स्थिति और तिथि का मेल इस व्रत के महत्व को और बढ़ा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, Jaya Ekadashi 2026 पर सच्चे मन से किया गया व्रत जीवन की बड़ी परेशानियों को भी दूर कर सकता है।
निष्कर्ष
जया एकादशी केवल एक व्रत नहीं बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम है। यदि आप अपने जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक बदलाव चाहते हैं, तो Jaya Ekadashi 2026 का व्रत श्रद्धा और नियमों के साथ जरूर करें। ROZ KI BAAT की ओर से यही सलाह है कि पूजा और व्रत हमेशा विश्वास और संयम के साथ करें।
Disclaimer:
इस लेख में दी गई जानकारी धर्म ग्रंथों, पंचांग और विद्वानों के मत पर आधारित है। ROZ KI BAAT इसका उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है। किसी भी धार्मिक कार्य से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
FAQs
❓ FAQ 1: Jaya Ekadashi 2026 कब है, 29 या 30 जनवरी?
उत्तर:
पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि का सूर्योदय 29 जनवरी 2026 को हो रहा है, इसलिए जया एकादशी व्रत 29 जनवरी, गुरुवार को ही रखा जाएगा, 30 जनवरी को नहीं।
❓ FAQ 2: जया एकादशी 2026 का शुभ मुहूर्त क्या है?
उत्तर:
जया एकादशी 2026 के दिन पूजा के लिए सुबह और दोपहर के कई शुभ मुहूर्त रहेंगे। विशेष रूप से अभिजीत मुहूर्त (11:17 से 12:39 बजे) पूजा के लिए उत्तम माना गया है।
❓ FAQ 3: जया एकादशी पर किस देवता की पूजा की जाती है?
उत्तर:
जया एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
❓ FAQ 4: जया एकादशी व्रत का क्या महत्व है?
उत्तर:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जया एकादशी का व्रत करने से पापों से मुक्ति मिलती है, जीवन में सुख-शांति आती है और व्यक्ति को मोक्ष मार्ग की प्राप्ति होती है।
❓ FAQ 5: जया एकादशी व्रत का पारण कब करना चाहिए?
उत्तर:
जया एकादशी व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में सुबह स्नान-पूजन के बाद करना चाहिए। पारण विधिपूर्वक करने से व्रत का पूर्ण फल मिलता है।